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आओ मियां, शिकार चलें

 


( आओ मियां शिकार चलें )

बेटे फुक्कन…कहाँ हो बेटे

भाई जान याद किया

हाँ बेटे ये बताओ  जमील कहाँ हैं

भाई जान, जमील भाई तो निकल गए

कहाँ निकल गए

हाथ से, मेरा मतलब वो टिकते कहाँ हैं आजकल घर पर, सारा दिन बाहर ही आवारागर्दी चल रही उनकी तो

अच्छा !! तो शमीम किधर गए

शमीम भाई तो फिसल गए

अरे कहाँ फिसल गए

पड़ोसन पर, मेरा मतलब पड़ोसन के दीवाने हुए रहते हैं सारा दिन, अभी उसको शॉपिंग कराने ले गए 

अबे ये क्या चल क्या रिया है इस घर में, एक निकल रिया है एक फिसल रिया है

अब क्या बताएं भाई जान ,मैं तो खुद मचल रिया था..मेरा मतलब गानो पे, टी वी पर आ रहे मस्त श्री देवी के गाने, कि आपने बुला लिया

अच्छा !! यार आज अब्बू का मन कर रिया है शिकार का..सुबह से कह रहे हैं फ़िरोज़ मियां आओ चलें शिकार पर

तो भाई जान टेंशन क्या है, चले जाओ

यार चलें तो जाएं पर अपने से कहाँ हो रिया  शिकार विकार.. शमीम और जमील साथ चलते तो हौसला बन जाता

तो उसमें क्या है,मैं चल देता हूँ साथ

क्या बात कर रहे हो, तुम चलोगे सही में??

हाँ हाँ बुलाओ अब्बू को चलते हैंगे

अरे वाह, ठीक है तुम जीप निकालो, मैं अब्बू को निकालता हूँ

बेटे सब ले लिया समान

जी अब्बू

पहुंच गए जंगल?? 

जी बस ये गेट पार करते ही जंगल शुरू, मारना क्या है अपन को वेसे, अब्बू??

देखो बेटे जो मार पाएं, वेसे बटेर की सोच रिया था मैं तो

चिचा अस्लामवालेकुम

वालैकुम अस्सलाम मियां, आपको पहचाना नही

मैं कय्यूम हूँ चिचा.. फॉरेस्ट के पास ही रहता हूँ, शिकार पे निकले हो क्या

जी बरखुर्दार

बस तो फिर कोई परेशानी हो अंदर तो खाली एक आवाज़ देना, भाग के आऊंगा मैं

ज़रूर ज़रूर, ही ही.. कितना नेक बंदा है, चलो बेटे फ़िरोज़ सपाटे में गाड़ी भगाओ अब .. 

अब्बू आ गए अंदर, यहाँ से पैदल ही चलना पड़ेगा, फुक्कन बेटे समान ले लो

ये कोई खोह सी दिखाई पड़ रही है, इसमें नेवले होंगे आओ, बेटे फ़िरोज़ यहीं से शुरू करते हैंगे शिकार

अब्बू मेरा ख़्याल टेलिस्कोप आप घर पे भूल आए अपने

टेलिस्कोप??

चश्में अब्बू चश्में, खोह नही है अच्छी खासी गुफा है, मेरी मानो तीतर बटेर समेट के निकल चलो वापिस, गुफा में यूं जाना रिकसी हो सकता है

एक तो तू बेटे अंग्रेजी की वालदा आपा मत किया कर, रिकसी नही रिस्की होता है, और आ गए हैं, तो मेरा ख़्याल नज़र मार ही लेते हैं गुफा में,क्यों बेटे फुक्कन तुम्हारा क्या कहना है

जी जी अब्बू एकदम दुरुस्त फर्मा रहे आप, घुस चलो गुफा में

लाहौल बिलाकूवत अंधेरा भोत हैगा, अरे बेटे फ़िरोज़ दिखा क्या नेवला

अब्बू नेवला दिखने में शेर जैसा होता है क्या

अबे क्या भांग खा के आया है क्या, नेवला तो नेवले जैसा ही दिखता है बेटे

अच्छा!! ये फिर शेर ही है

क्या कह रिये हो बेटे, सलवार में बेल्ट नही पहनी आज, नाड़े में टिकेगी नही..सही बता कौन सा जनावर हैगा

शेर ही है अब्बू

तो खाँ फुक्कन….  पिततौल कहाँ हैगी

अब्बू हाथ में

तो कब दागने की सोच रहे हो बेटे.. शेर हमको समझ के फ़ारिग हो लेगा तब??

अब्बू मिस्टेक से दिवाली वाली गन आ गई हैगी साथ , चिटपिटिया चला दूँ

तू टीका लगा के शेर को नारियल भी फोड़ ले और सोन पापड़ी भी खिला दे, अबे कैसी औलादे दे दी रुकसाना तुमने, और तुम तो देके चली गईं, ये साले अब्बू को शहीद करवा देंगे आज .. चिट्पटी वाली पिततौल ले आया नालायक..अरे बेटा फ़िरोज़ वो क्या नाम था उस लौंडे का बाहर मिला था जो

अब्बू, कय्यूम

हाँ, उसको आवाज़ लगा देते हैं, बोला था एक आवाज़ पर भाग के आ जाएगा.. अरे बेटा कय्यूम !!!!!  फुक्कन देखो तो आया क्या कय्यूम

घंटा आया अब्बू

अच्छा!! एक आवाज़ पे भागने की बता रिया था सुसरा, दूसरी साइड भाग गया लग रिया है.. बेटे फ़िरोज़ अब क्या करें

मैं तो पेले ही बोल रिया था बुढऊ, तीतर बटेर समेट के निकल चलो, तुम्हारी ही दिलेरी फड़फड़ा रही थी ज़्यादा

बेटे फ़िरोज़ एक काम करो पेड़ पे चढ़ जाओ

कहाँ के पेड़ अब्बू, शेर की गुफ़ा में पेड़ लगाने मामू जान आए थे ना हमाए

ओह!! तब तो बेटे अब हमें बात करनी होगी शेर से और कोई चारा नही.. शेर बेटे देखो आदमी गलतियों का पुतला होता है, ख़ुदा ने सबसे बेहतरीन चीज़ अगर इस कायनात में कुछ बनाई तो वो इंसान बनाई,उसे यूँ ज़ाया करना ठीक नही बेटे.. अल्लाह आगे कहता है…

अरे फुक्कन

जी भाई जान

अब्बू तो शेर को मेरा ख़्याल आज ईमान दिला के मानेंगे इससे पहले वो कलमा पढ़ के सर कलम कर दे अपन का, निकल चलो सरकते सरकते पीछे कू

अरे पर फ़िरोज़ भाई जान,अब्बू??

क्या करेगा अब्बू का, जायदाद भोत है,पैसा ज़रूरी होता है बे

नही भाई जान अब्बू ज़रूरी होते हैं

अबे घंटा, अब्बू देके दही ला सकता है??

नही

फिर जब अब्बू से दही भी नही आ रिया तो पैसा ही सबसे ज़रूरी होता है, चल अब सरक ले, शेर को मौलाना बना रिया बुढऊ यही मौका है


Written by Aseem Tiwari


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